फाफडा फाइलें: मसालेदार भारतीय भोजन! तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई??

एक चिंतित पिता ने बहुत ज्यादा रोष प्रकट किया, जब उसने सुना कि उसके बेटे को, उसके दोस्त के घर पर मसालेदार भारतीय भोजन परोसा गया, मीनू शाह यहां दोषदर्शी के चरित्र में है और बेटे के परिवार के लिए बोलती हैं

 जबकि, सारा संसार लॉकडाउन, चुनाव, भ्रष्टाचार और गर्मी से खीझ गया है; वहीं, यूनाइटेड स्टेट में, एक पिता सर्वश्रेष्ठ पिता(इस साल का सर्वश्रेष्ठ पिता) को पैनिक अटैक आ रहा है और वह सेना को बुलाने वाला है क्योंकि उसके नौ साल के पुत्र को भारतीय भोजन खिलाया गया था। मैंने श्रमसाध्य रूप सेउसके पिता का ब्लॉग जैसा था बिल्कुल वैसा ही लिखने  की कोशिश की है, जिस ब्लॉग पर, कोई और नहीं, शेफ पद्मा लक्ष्मी ने  एक साधारण  क्षमा मांगी है ‘सॉरी…… क्या?’

                    मेरा बेटा, “क्रिस,” 9 वर्ष  का है। कुछ हफ्ते पहले, हमने यह निर्णय  किया कि “नील”, जो क्रिस का सबसे  अच्छा मित्र है , उसके परिवार को शामिल करने के लिए अपने दिल का दरवाजा खोल दिया।  नील के माता-पिता दोनों ही  डॉक्टर हैं; इसलिए, यह हमारे लिए  एक सुरक्षित निर्णय प्रतीत हुआ। उसके  माता-पिता दोनों का जन्म और पालन-पोषण भारत में हुआ। चुकी, दोनों लड़के  एक दूसरे के साथ अच्छा समय व्यतित कर रहे थे। इसलिए, हमने क्रिस को, उनके घर, रात्री भोजन पर जाने दिया। जब हम क्रिस को लेने वापस आए, तो नील की माँ ने मुझे बताया कि क्रिस  ने कितना अधिक चिकन करी, दाल और सब्जियाँ  खाईं। मैं,  विश्वास नहीं कर सका कि मुझे बिना सूचित किए कि मसालेदार भोजन खिलाना ठीक होगा, उन्होंने  मेरे बेटे को मसालेदार  करी परोस दी।  मुझे झटका  लगा और  बड़े सभ्य रूप से मैंने कहा कि मसालेदार भोजन, नन्हें  पेट के लिए हानिकारक  हो सकता है, परंतु  ऐसा प्रतीत हुआ कि उन्होंने मेरी बात पर ध्यान नहीं दिया। शुक्र है कि क्रिस बीमार नहीं प़डा।  मेरी पत्नी ने इस बात को जाने देने के लिए कहा,  क्योंकि कोई भी बातचीत नस्लीय लगेगा और सिर्फ  लड़कों को हमारे ही  घर पर खेलने का निर्णय लिया, कृपया सहायता करें।

                       मैं, लगभग दुनिया भर के भारतीयों के हाथों में डंडा और कडछियां  देख सकती हूं,  पूरे संसार में फैले भारतीय अपनी दादी मां की भोजन बनाने की पुस्तक और मसाले के बर्तन का बचाव  करते रहते हैं। मैं  एक भारतीय होने के नाते, राष्ट्रीय गौरव महसूस करती हूं; जब कोई  हमारे भोजन के  स्वाद की निंदा करता है तो हमारे साथी भारतीय,  इसके बचाव में सामने आते है इससे भी कहीं अधिक आश्चर्य की बात यह थी कि कैसे  गैर-भारतीय, जो आइवरी कोस्ट से लुइसियाना तक फैले है, ने चिकन करी का बचाव, क्रिस के पिता के मेयोनेज़ की श्रेणी को मसले की भीड़ में, असतत  वर्गों में विभाजित करके किया। (क्रिस के पिता का नाम,  पेंटागन  के फाइलों में गुप्त रखा गया है, यह इसलिए है कि “सेना” ने कभी बदला लेने का सोचा तो)

                           इसलिए, मैंने दोषदर्शी होने का और क्रिस के परिवार के तरफ से बोलने का निर्णय किया कल्पना कीजिए कि  माता-पिता को एक सिंगल  स्टोरी  सुनाई गई और आप अपने संस्कृति के अनुसार उनकी संस्कृति का  मूल्यांकन कैसे कर सकते हैं। आप अपनी कल्पना को बहुत दूर तक  नहीं ले जा सकते है– मैं समझती हूं। इस मामले में, आइए हम, क्रिस के पिता की मौखिक प्रक्रिया को समझते हुए यह व्याख्यान करते हैं कि उन्होंने क्यूं अपने पुत्र को उसके सबसे अच्छे दोस्त नील के घर जाने की अनुमति दी……

‘… भले ही उसके (नील के) माता-पिता भारत में पैदा हुए और पले-बढ़े हों’

इस अवसर पर, मैं आई.एन.एस (Immigration and Nationalisation services, यू.एस.ए) कॉल करने के लिए प्रलोभीत थी- ‘तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई’?

‘… नील के माता-पिता दोनों ही डॉक्टर हैं, इसलिए क्रिस के पिता को लगा  कि यह एक सुरक्षित निर्णय  है।’

क्योंकि डॉक्टर समृद्ध होते हैं,  महंगी  गाड़ियां चलाते हैं, खर्चीले  छुट्टियों पर जाते हैं और इस प्रकार उनका  सामाजिक-आर्थिक संयोजन बरकरार  रहता है हूं, मैं अभिजात्य, विशेषाधिकार प्राप्त परिप्रेक्ष्य देखता हूं।

‘… मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि उन्होंने मेरे बेटे को मसालेदार करी परोसी, वो भी बिना मुझसे पूछे कि क्या यह ठीक होगा या नहीं!’

                        यहाँ, मुझे क्रिस के पिता के लिए बुरा महसूस हुआ, क्योंकि वह बस इतना चाहता था कि उसे भी खाने पर  शामिल किया जाए आप देखिए, अधिकांश ऐसे परिवार, जिन्होंने असंयुक्त जीवनशैली (न्यूक्लियर लाइफस्टाइल) को चुना है, वे अपने आप को पृथक महसूस करते हैं और दूसरों के साथ सम्मलित होने की लालसा रखते हैं। तो क्या, हमें सहानुभूति में अपना सिर नहीं हिलाना चाहिए और थाली बजाते हुए जोरदार संगीत के साथ उनके घर नहीं जाना चाहिए?

‘… शुक्र है कि क्रिस बीमार नहीं प़डा…!

इस बिंदु पर, मैं भावना से अभिभूत थीक्या! देखभाल करने वाले पिता है,  हालांकि उन्हें अपने बेटे के मानसिक स्वास्थ्य के बारे कोई खबर नहीं है; उसका ध्यान, सिर्फ बेटे के शारीरिक स्वास्थ्य पर था, जैसे उसने अपने सारे जीवन में देखा था।

‘… मेरी पत्नी ने कहा,  इस बात को यही छोड़ों, क्योंकि कोई बातचीत नस्लवादी लगेगी।’

                          यह निरपेक्षता के ताबूत में आखिरी कील थी। मैं उन्हें गले लगाना, उनके पीठ पर थपथपाना और कहना चाहती थी: यह तुम्हारी गलती नहीं है और  तुम्हें नस्लवाद के बारे में चिंतित होने की आवश्यकता  नहीं  है, यह तुम्हारे अस्तित्व का सार है। दुनिया को देखने का दृष्टीकोण  गोरा या कोई और रंग हो सकता है । तुम्हारे भोजन के विकल्प मांस, आलू और वो सभी बिना स्वाद वाले भोजन तक सीमित है। आप आराम से अपने ढकोसले जीवन में रहते है; जब तक कि जीवन आपको परेशानी में ना डाल दे, जहां आप चारों ओर से स्वाद, रंग और संस्कृतियों से घिरे हों – ओह,  इतना  विदेशी  मैं तुम्हें एक सफेद शंक्वाकार टोपी  ला कर दूंगी,  जिसमें तीन छेद और एक धाधरा  होगा, अगर तुम इससे अच्छा महसूस करोतो इसे हमेशा पहनें।  इसलिए, कोई भी भारतीय, हिस्पैनिक या कोई भी अज्ञात नस्ल के लोग को अपने बंद दिमाग में घुसने ना दे  और जीवन के बारे में संकीर्ण दृष्टि का अति विचार मत करे।

टेड टॉक – लेखक नोमज़ी अदिची, चिम्मांडा द्वारा सिंगल  स्टोरी मुहावरों  का प्रयोग  करती है, उन चीजों को बताने के लिए जो काफी साधारण हैं और  कभी-कभी  व्यक्ति, समुह या देश के बारे में गलत धरना बना  ली जाती है।

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