हर्ष गोइंक़ा- “बीस मुख्य भारतीय भोजनालय”

बीस इंडियन टाप रेस्तरां

1-इण्डियन एक्सेंट, लोधी,नई दिल्ली:

इसमें कोई दो राय  नहीं है कि” इंडियन एक्सेंट ” भारत के प्रसिद्ध  भोजनालयों (रेस्तराओं) में से एक है।और मनीष महरोत्रा आज के समय में  भारत के प्रसिद्ध और प्रचलित खानों को संसार में  नई और अलग पहचान  दिलाने  वाले  प्रथम शेफ हैं । उन्होंने भोजन परोसने के अंतर्राष्ट्रीय तौर तरीकों को  अपनाते हुए भारतीय स्वाद  को बरकरार रखा।और भारतीय खानों को उस तरीके से परोसने  की  शुरुआत की जो स्वाद के साथ साथ देखने में भी अच्छे और लुभावने लगे। यहाँ की “मुरादाबादीदाल और दौलत की चाट” मेरे पसंदीदा खाने हैं,और इसलिए मैंने  दोनों खानों को मेन्यू कार्ड में शामिल कराया।

2-अवर्तन,आईटीसी, चेन्नई:

अवर्तन का अर्थ है “टर्निग पाइंट ” अर्थात इस रेस्तरां में  साउथ इण्डियन खानों को एक नया रूप देकर उन्हें खास तरीके से मिड कोर्स  मील के रूप शुरू किया गया । मैं यहाँ के रसम पेश करने के तरीके से बहुत सम्मोहित हुआ जिसमें फ्रैंच प्रैस द्वारा हर्बस मिलाए गए और मादक द्रव की तरह मार्टिनी गिलास में पेश किया गया।और जो मेरे लिए पूरे रास्ते एक यादगार व कुछ प्राप्त करने वाला अनुभव रहा। यहाँ का मैनयू कार्ड भी बहुत लुभावना है और उसमें बहुत ही स्वादिष्ट खानों को शामिल किया गया है जिसके कारण मैं अकसर चेन्नई जाने के  लिए ललायित रहता हूँ।

3-मास्क, मुम्बई:

मुम्बई में पारम्परिक भोजन का फिर से चलन शुरू करने का सारा श्रेय  शेफ प्रतीक सिन्धु को जाता है।  कश्मीरी स्वाद से प्रेरित खानों में हमेशा मसाले बहुत आवश्यक होते हैं। और इसीलिए शेफ निरन्तर इस बात  की कोशिश  करते हैं  कि मौसम के अनुरूप मिलने वाली खाद्य सामग्री को नयापन देकर स्वादिष्ट खाने के रूप में पेश करें।यहाँ पर हिमालय घाटी में मिलने वाली अनोखी छोटे गूदेद्दार फल (एक्जोटिक  बेरीज), गुच्छे (माॅरेल) और सब्जियों का प्रयोग कर खाने में उन्हे एक नया रूप दिया।यहाँ पर मिड कोर्स में परोसने जाने वाली कई परतों वाली रोटी, अखरोट की चटनी के साथ व अन्य खानें मेरे पसंदीदा  खानें हैं। इस रेस्तरां की एक खासियत यह है कि यहाँ पर खाना चखने के लिए एक कमरा (टेस्टिंग रूम) है जहाँ आप अपने  मित्रों के साथ खाने का अनोखा आनंद उठा सकते हैं जो कि एक बिल्कुल नया कांसेप्ट है।इस रेस्तरां से कुछ अंतर्राष्ट्रीय शेफ जुडे हुए हैं  जिसकी वजह से यहाँ  का खाना बहुत ही शुद्ब और बुनियादी है।

4-द-टेबल,मुम्बई:

2011 में  इस रेस्तरां  की शुरूआत  हुई ,यह पहला ऐसा रेस्तरां  है, जहाँ  पहली बार अंतर्राष्ट्रीय मैनयू के साथ  छोटी प्लेट का चलन शुरू किया गया। तब से निरन्तर इसके खाने का स्वाद और भी बढ़ गया है।इस रेस्तरां में सेहत का ख्याल रखते हुए हेल्दी नूडल्स वर्जिन का प्रयोग किया जाता है जिसकी वजह से  मैं  यहाँ  के  ट्रफल पास्ता, जुकीनी स्पेगिटी और कैरामल आइसक्रीम विद् पाॅपकार्न  को अधिक  मात्रा में नहीं खा पाता। इस रेस्तरां  में सुन्दरता और सरलता  के अनोखे सांमजस के साथ गर्मजोशी का भी बहुत अहसास होता है।

5-वासावी, ताजमहल,मुम्बई:

मुम्बई के वासावी का रेड एण्ड वुड पैनल भोजन  कक्ष हर शनिवार को मुम्बई के उच्च वर्ग के लोगों से खचाखच भरा रहता है ।और  यहाँ  बिना रिजर्वेशन के  जगह मिलना बहुत मुश्किल होता है। इसलिए यहाँ पहले से रिजर्वेशन कराकर जाएँ । इसकी कामयाबी  की  वजह यहाँ के खानों में  असली (शुद्ध) व ताजी खाद्य सामग्री का इस्तेमाल करना है  जोकि  प्रतिदिन जापान  से ताजे लाए जाते हैं। 

यहाँ शाकाहारी खाने  “टोफू कारपासियो व आवाकाडो टेकोस” का खूब लुत्फ उठाया जा सकता है। मैंने ये खाने  फिलाडेल्फिया के मोरीमोतो रेस्तरां,जो कि वासावी का पार्टनर है; में भी खाए हैं,और मैं विश्वास के  साथ  कह सकता हूँ कि वासावी का खाना वहाँ  के खाने से अधिक स्वादिष्ट और अच्छा है। मुमकिन है कि  यहाँ  खाना परोसने के  तरीके  व स्वाद में भारतीय अंदाज है।

6-इजुमी,मुम्बई:

इस रेस्तरां में हमेशा कैफे जैसा आकर्षक वातावरण व युवा वर्ग की खूब चहल-पहल रहती है। यघपि यह रेस्तरां बहुत बड़ा नहीं है, परन्तु यहाँ जाना अच्छा लगता है क्योंकि इस जगह का जापानी खाना इतना स्वादिष्ट है कि इसे देखकर  मुँह में पानी आ जाता है। यहाँ का खाना बहुत ही स्वादिष्ट है, जिसमें ताजा  खाद्य सामग्रियों का इस्तेमाल किया जाता है, इनमें  से ज्यादातर  जापान से लाई जाती हैं। इन सबके बावजूद यहाँ के दाम  बहुत  उचित हैं। रेमन नूडल्स और सूशी मेरे पसंदीदा खाने हैं।यघपि इनका मैनयू थोड़ा छोटा है,लेकिन अच्छे  खाने को अनुभव करने के लिए काफी शाकाहारी विकल्प हैं।

7-बोम्बे कैन्टीन, मुम्बई:

इस रेस्तरां  में  कालेज  कैन्टीन की तरह खूब भीड़-भाड़ व चहल-पहल रहती है  यहाँ पर उचित दामों पर क्षेत्रीय खानों का अपना ही मजा लिया जा सकता है।पसंदीदा क्षेत्रीय व स्थानीय खानों को अच्छे तरीके से कलात्मक रूप में पेश करने की यह एक फलती फूलती जगह है। अतः इस रेस्तरां में अत्यधिक आधुनिक खाने की ख्वाहिश न रखें बल्कि घर जैसे मीठे-खट्टे और तीखे खाने का आनंद  लें। यहाँ कि मेहमाननवाजी में अपनेपन का बहुत बढ़िया अहसास होता है। जब आप यहाँ जाए तो यहाँ  आप बाजरा और ज्वार का स्लाद, दाबेली खाएं  और अंत में काॅफी और रसगुल्ला खाएं।मुझे बाम्बे  कैन्टीन का “फूड फेस्टिवल” बहुत पसन्द है, जिसमें  वे क्षेत्रीय खानों -जैसे उड़िया,बंगाली और साउथ इण्डियन- के प्रतिनिधियों को बुलाते हैं। टाॅम जकारिया युवा हैं, और इस क्षेत्र में  सक्रिय हैं  इसलिए मैं उम्मीद करता हूं कि वे इन जगहों पर जरूर जाएंगे।

8-बुखारा,आईटीसी मोर्या, नई दिल्ली:

दिल्ली का बुखारा रेस्तरां  नार्थ फन्टियर फूड के लिए हमेशा से प्रसिद्ध रहा है। और अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के इस स्थान पर आने के बाद इस रेस्तरां की अपनी खासियत  बढ़ गई है। जब यह रेस्तरां  शुरू हुआ  तो इसमें सबसे पहले खुले किचिन का चलन शुरू हुआ।समय के बीतने के साथ यहाँ के खाने के स्वाद और गुणवत्ता में कोई फर्क नहीं आया है यघपि यहाँ का मैनयू सीमित है लेकिन यहाँ के कुछ खाने  बहुत ही स्वादिष्ट हैं। इस रेस्तरां की दाल बुखारा बहुत ही स्वादिष्ट है, जो कि आईटी सी पूरे विश्व में डिब्बों में  निर्यात करता है। यहाँ का तंदूरी खाना भी खूब स्वादिष्ट है,खासतौर से तंदूरी गोभी और पनीर बहुत  ही उत्तम हैं। यहाँ पर इन खानों को भारतीय ढंग  हाथों से खाने का अपना ही मजा है।

9-चिनोइसेरिए ,ताज बंगाल, कोलकाता:

कोलकाता का यह चाइनीज रेस्तरां ताज मुम्बई  के  गोल्डन ड्रैगन से  प्रेरित है और भारत के  प्रसिद्ध  रेस्तराओं में से एक है।इस रेस्तरां में  चीन के विभिन्न हिस्सों के  भिन्न भिन्न स्वाद वाले खानों का मजा लिया जा सकता है। यहाँ के क्रेकलिंग स्पनिच (कुरकुरी पालक) और कार्न कर्नेल बारहमासी  पसंदीदा खाने हैं। इस रेस्तरां की मेहमाननवाजी बहुत  ही अच्छी है और यहाँ के कर्मचारी मेहमान  की हर जरूरत को पूरा करने के लिए पूर्णरूप से तत्पर रहते हैं। यहां के खानों में भारतीय स्वाद को पूरी तरह से ध्यान में रखा गया है।

10-ठक्कर भोजनालय, मुम्बई:

मेरे बचपन की  खूबसूरत यादें  इस रेस्तरां  से  जुड़ी हुई है,जब मैं बच्चा था तब से मैं  यहाँ  जा रहा हूँ और जब यहाँ  एक वक्त  का खाना  केवल रू 10/-में  मिलता था। आज ये बढ़कर रू 500/-का हो गया है व वातानुकूलित भी हो गया है ,परन्तु यह रेस्तरां बहुत ही सादा और बुनियादी है जैसे माईका के  मेज और स्पंज भरी हुई कुर्सियां।इस रेस्तरां  के माहौल में जो कमी है वह यहां की गर्मजोशी वाली मेहमाननवाजी पूरा कर देती है। यहाँ पर ताजा गुजराती खाना मिलता है जोकि थोड़ा राजस्थानी स्वाद से प्रेरित है ।इस रेस्तरां की खासियत यह है कि यहाँ पर गर्मागर्म जितना चाहो उतना खाना मिलता है ।यहाँ की पहली मंजिल का खाना  बहुत प्रसिद्ध है और अगर आप वहाँ जाने की  इच्छा रखते हैं तो  वहाँ इंतजार करने के लिए  तैयार रहें। यह बहुत रूचिपूर्ण  है कि  यह रेस्तरां  अंतर्राष्ट्रीय पाक जगत में  बहुत ही  मशहूर है और इसीलिए सभी प्रसिद्ध शेफ जब भारत आते हैं तो इस भोजनालय में एक बार धार्मिक स्थल की तरह जरूर आना चाहते हैं।

11-त्रिसिनद,मुम्बई:

यह एक बहुत ही खूबसूरत रेस्तरां हैं। जहाँ का खाना न सिर्फ नज़ाकत और नफासत से  पेश किया जाता है ब्लकि वह स्वादिष्ट भी है। और अगर हम दामों की बात करें तो अन्य रेस्तराओं की तुलना में यहाँ के भोजन के दाम बहुत उचित हैं। हम कह सकते हैं कि देश के  भिन्न प्रदेशों से लाए मसाले और अन्य मिश्रण यहाँ पर बनी दाल व खाने एक अलग आनंद की अनुभूति देते हैं। और ऐसा लगता है कि जैसे राष्ट्रीय एकता को भी बढ़ावा दे रहे हों। यहाँ की खास बात यह है कि आपके सामने ही आप की मेज पर बनाई गई  स्वादिष्ट दाल, जो इस जगह को सबसे अलग बनाती है।और यहाँ  के  कुछ स्थानीय  व्यंजन जैसे खांडवी और गाजर का हलवा मुझे बहुत पसन्द  हैं।

12-ओ पेट्रो,मुम्बई:

जब तक मैनें  ओ पेट्रो रेस्तरां  का खाना  नहीं खाया  था  तब तक मैं कभी भी  गोवा के खाने  का मुरीद  नहीं  था।शेफ शहजाद हुसैन  ने गोवा के  पारम्परिक  भोजन को एक नयापन और प्रान्तीय  भोजन की भिन्नता को अपनाते हुए उनको बहुत ही आधुनिक रूप दिया। उन्होंने नारियल और कोकम के स्वाद को बरकरार  रखते हुए गोवा के  खाने को जो नए रूप दिया वो वाकई  तारीफे काबिल है। यह रेस्तरां बहुत  ही अच्छा डिजाइन किया गया है और जो गोवा की खूबसूरती  को  दर्शाता है जिसके लिए गोवा जाना जाता है।

13-आर्टूसी रेस्तरां,नई दिल्ली:

आर्टूसी रेस्तरां की खास बात  क्या है,मैं कह सकता हूँ कि यह एक बिना ताम झाम वाला अच्छा भोजनालय है। यहाँ के माहौल में बहुत ही अपनापन है यहाँ  पर वास्तविक इटालियन खाना गर्मजोशी के साथ खुशनुमा माहौल  में  परोसा जाता है। आर्टूसी में इटालियन स्वाद को ध्यान में रखते हुए यहाँ रोज पास्ता अपने हाथों से बनाया जाता है,इसके अलावा  वे ब्रेड व साॅस स्वयं अपने इन- हाऊस में बनाते हैं। यहाँ के सूप और पास्ता बहुत ही स्वादिष्ट और मजे के हैं। जबकि “तिरामिसू” को मैं  सभी को खाने  की सलाह  दूंगा।

14-ला-प्लागे,गोवा:

इस फ्रैंच रेस्तरां की खासियत यह है कि यह रेतीले समुद्रतट के सामने  बना हुआ है। यहाँ झूलों व आराम से बैठने की व्यवस्था छुट्टियों का मजा और भी बढ़ा देती है। यह रेस्तरां एक फ्रैंच युगल चलाते हैं जो कि हर वर्ष अपने मैनयू को ताजा (रिफ्रेश)करते हैं जिसमें  वे पूरे वर्ष  मिलने वाले कुछ पसंदीदा खानों को जरूर शामिल  करते हैं। यघपि भारत में  स्वादिष्ट फ्रैंच खाना मिलना मुशिकल है परन्तु यहाँ के बीटरूट और मैंगों कारपैसियो खाने दिल को जीत लेनेवाले  हैं ।अगर आप  गोवा में  हैं तो समुद्र  के  किनारे इस स्थान पर खाने का अपना अलग ही मजा है। 

15-रेवेरी, गोवा:

यह समुद्रतट से थोड़ी दूरी पर स्तिथ है, और इसके चारों तरफ खूब जगह होने की वजह से यह स्थान बहुत ही लुभावना लगता है। इस रेस्तरां का मैनयू अन्य रेस्तराओं के मैनयू से बहुत ही अलग है और यहाँ मौसम के अनुसार  खाद्य सामग्रियों  को ध्यान में रखते हुए अकसर मैनयू  में बदलाव  किये जाते हैं। यहाँ पर यूरोपियन भोजन को बहुत ही सुंदर ढंग से  पेश किया जाता है।

16:बोमरा, गोवा:

जैसा कि  किसी ने कहा है कि यह “गोवा का बेस्ट कैप्ट सीक्रेट”है। यानि यह गोवा का सबसे अच्छा रहस्य है। यह रेस्तरां वोमरा जैप द्वारा बनाया गया था,जो कि नए नए खाने बनाने के लिए जाने जाते हैं, इसलिए बोमरा रेस्तरां भी अपने नए नए खानों के लिए प्रसिद्ध है।बोमरा, बर्मी खाने का एक बहुत ही सर्वश्रेष्ठ रेस्तरां है, जो कि मेरा पसंदीदा खाना है। बर्मी खाना भारतीय  स्वाद  के साथ खूब अच्छी तरह से मेल खाता है,और जो काफी स्वादिष्ट व बहुत ताजा  होता है।यहाँ के टोमैटो सलाद और खाऊ सूए मेरे पसंदीदा खाने हैं।

17-दीवा,दिल्ली:

इस रेस्तरां को रेस्तरां दीवा रितु डालमिया चलाती हैं, दीवा भारत के अच्छे इटालियन रेस्तराओं में से एक है। यहाँ पर आपको देश का सबसे पतला और कुरकुरा पिज्जा मिलेगा,और अगर आप मौसम के मुताबिक  ताजे ट्रफल खाने की चाहत रखते हैं तो उसके लिए यह एक बहुत सही स्थान है।

18-गनपाउडर, गोवा:

यह रेस्तरां  बहुत ही आकर्षक पुर्तगाली विला में  बना हुआ है गनपाउडर रेस्तरां  में साउथ इण्डियन खाना मालाबारी स्वाद लिए हुए पेश किया जाता है। खासतौर से यहाँ के अप्पम और इज़टू अत्यंत स्वादिष्ट -उंगलिया चाटने वाले- खाने हैं।

19-कोमोरिन,गुड़गाॅव:

यह मनीष महरोत्रा का नया कम्यूनिटी भोजनालय है। यहाँ पर हर क्षेत्र के सुपाच्य आहार (आरामदेह  भोजन) और पसंदीदा  स्ट्रीट फूड बहुत ही लुभावने ढंग से परोसे जाते हैं। यहाँ  का माहौल बहुत ही आधुनिक और आकर्षक है। और खाना भी बहुत सादा, ताजा और अत्यंत  स्वादिष्ट है।

20-क्वालिया,मुम्बई:

राहुल अकरेकर ने  भारत में  इंडिगो से अच्छे और स्वादिष्ट खानों की शुरूआत की, और नये खानों की पेशकश  से पुनः पाक जगत में अपनी अलग पहचान  बनाई। उन्होंने महीनों एक मैनयू और स्वादिष्ट खानों की पेरिंग (जोड़ा- एक दूसरे के  अनुकूल) को बनाने में  लगाए जो कि खाने के  प्रति उनके  ज़ुनून को दर्शाते है। इनके पिज्जा और पास्ता इतने स्वादिष्ट हैं कि  मुँह में पानी आ जाता है। यहाँ वे जो  भी परोसते हैं उसकी सीरत देखने में बहुत ही लुभावनी है, और उसमें  मीठे व खट्टे  का स्वाद बहुत ही दिलचस्प सन्तुलन लिए हुए  हैं।

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